Shri Mathuranathji

आप श्रीगोकुलनाथजी के ज्येष्ठ आत्मज हुए। आपश्री का प्राकट्य वि. सं. १७७१ में हुआ। आपश्री के काल में जतिपुरा सुरभि-कुंड मंदिर का विस्तार हुआ तथा प्रभु के कई ऐतिहासिक मनोरथ संपन्न हुए। आपश्री के कार्यकाल में जतिपुरा गृह का स्वर्णिम समय रहा है।