Shri Govardhaneshji
आप श्रीमथुरानाथजी के पंचम पुत्र हुए। आपश्री का प्राकट्य वि सं १८२५ में हुआ। आपश्री के भ्राता श्रीबालकृष्णजी महाराज के नित्य लीला प्रवेश के बाद, उनके ठाकुरजी श्रीबालकृष्णलालजी (श्री महाप्रभुजी के निधि – रजो क्षत्रानी के सेव्य स्वरुप) भी कृपा करके आप ही के माथे पधारे।
उन्हीं श्रीबालकृष्णलालजी को आपने बंबई पधराये तथा आपश्री ने ही बंबई में मोटा मंदिर का निर्माण करवाया।